Crime

By Ajaz Khan
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2020-07-10

8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाला विकास दुबे एनकाउंटर में हुआ ढेर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरु में डीएसपी समेत 8 पुलिसवालों की बेरहमी सर हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार सुबह एनकाउंटर में मारा गया। विकास दुबे को गुरुवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था, हालांकि ये गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण किया इसपर भी कुछ लोगों से सवाल उठाए है। इसके बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने उसे यूपी एसटीएफ को सौंप दिया गया था। एसटीएफ उसे कानपुर ले जा रही थी। शुक्रवार सुबह शहर से करीब 16 किमी पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह 6:30 बजे काफिले की एक गाड़ी पलट गई, बताया जा रहा है कि विकास दुबे उसी गाड़ी में था,

पुलिस के मुताबिक इसी दौरान विकास दुबे ने पुलिसवालों की पिस्टल छिनकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उसे मारा गिराया। इस तरह से हिस्ट्रीशीटर विकास की क्राइम हिस्ट्रीशीट 'बंद' हो गई। आपको बता दे विकास दुबे पर 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। 19 साल पहले उसने 2001 में थाने में घुसकर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने राजनीति में एंट्री ली। नगर पंचायत का चुनाव भी जीता था। 2017 में भी लखनऊ में एसटीएफ ने कृष्णा नगर से विकास दुबे को दबोचा था। बदमाशों का गैंग बनाया।

विकास कानपुर देहात के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरु गांव का रहने वाला था। उसने बदमाशों की गैंग तैयार की और खुद सरगना बन गया था। कानपुर नगर और देहात तक लूट, डकैती और हत्या जैसे अपराधों को अंजाम देता रहा था। 2000 में उसने शिवली के ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या कर दी थी। इसमें उम्रकैद हुई। ऊपरी अदालत से जमानत पर बाहर आया था।

राज्यमंत्री की हत्या

बताया जाता है कि विकास अपराध के रास्ते पर चलते हुए कुछ नेताओं के संपर्क में भी आया था। 2001 में शिवली थाने के अंदर घुस कर उसने श्रम संविदा बोर्ड के चेयरमेन रहे और राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता संतोष शुक्ल की गोली मारकर हत्या कर दी। गवाह नहीं मिले तो विकास बरी हो गया। उसका ब्राह्मण शिरोमणि पंडित विकास दुबे के नाम से फेसबुक पेज भी है।

नगर पंचायत चुनाव जीता

2002 में जब प्रदेश में बसपा सरकार थी तो विकास का खौफ बिल्हौर, शिवराजपुर, रिनयां और चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में भी था। 2018 में विकास ने चचेरे भाई अनुराग पर जानलेवा हमला किया था। 2004 में केबल कारोबारी दिनेश दुबे की हत्या के मामले में भी विकास आरोपी था। जेल से ही उसने शिवराजपुर से नगर पंचायत का चुनाव जीत लिया था। विकास दुबे के की गिरफ्तारी पर 5 लाख का इनाम भी था।

हालांकि जिस तरह पुलिस की थ्योरी है उस पर भी सवाल खड़े होने लगे है, आपको बता दे इस से पहले विकास का दूसरा गुर्गा प्रभात को भी इसी तरह पुलिस लेकर आ रही थी उसी दौरान पुलिस की जीप पंचर हो जाती है और कहा जाता है कि प्रभात भी पुलिस के हथ्यार लेकर भागने की कोशिश की थी जिसे एनकाउंटर में मार गिराया गया, इसी तरह आज भी पुलिस कह रही है कि विकास दुबे को ले जाते समय उसकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, उसी दौरान विकास दुबे पुलिस के हथ्यार को छीन कर भागने लगा, साथ ही पुलिस पर फायरिंग भी की, जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे को गोली लगी, उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई, इस गोलीबारी में पुलिस के दो जवान को भी गोली लगी है लेकिन वो खतरे से बाहर है, बता दे 2 से 3 जुलाई की रात 12.30 के आसपास कानपुर के चौबेपुर थाना इलाके में बिकरू गांव में पुलिस टीम विकास को पकड़ने के लिए जाती है।

इसकी जानकारी गैंगस्टर विकास को पहले से होती है। वह अपने साथियों के साथ पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाता है। इसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हो जाते हैं। इसी तरह इस एनकाउंटर के बाद विकास दुबे की आतंक कथा समाप्त हो गई

Police Encounter Vivek Dubey

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