Politics

By Ajaz Khan
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2020-11-09

अमेरिका का नया बॉस "जो बाइडेन"

अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद अब ये साफ हो गया है कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति जो बाइडेन होंगे, हालाकि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपनी जीत का दावा कर रहे थे, लेकिन आखिरकार वो जो बाइडेन से हार गए, बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के संकेत उसी दिन मिल गए थे जब से उनकी सुरक्षा का जिम्मा अमेरिका की सीक्रेट सर्विस ने संभाला था, व्हाइट हाउस का रास्ता साफ होते ही बाइडेन से सबसे पहले यही एलान किया कि वो अब पूरे अमेरिका के राष्ट्रपति है, और पहला काम देश को एकजुट करने का करेंगे, बाइडेन की ये प्रार्थमिकता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार राष्ट्रपति चुनाव में जिस तरह कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है उस से ऐसा लगता है कि अमेरिकन दो खेमो में बंट गए है, ऐसे में ये अमेरिका के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नही है

बाइडेन ऐसे वक्त में अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए हैं जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रहा है, खुद अमेरिका कोरोना से सबसे अधिक ग्रसित है, पूरी दुनिया मे सबसे अधिक संक्रमित लोगों की संख्या अमेरिका में ही है, और सबसे अधिक कोरोना से मौत भी अमेरिका में ही हुई है,इसके अलावा देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है, लाखो लोग बेरोज़गार हैं, ऐसे में बाइडेन की सबसे बड़ी चुनौती कोरोना और इस से उत्पन्न हुए हालात से निपटने की होगी, कोरोना महामारी को लेकर ट्रंप ने जिस तरह का शरू से रवैया अपनाया उसका ख़ामियाज़ा अमेरिका भुगत रहा है

ऐसे में इस बात से इनकार नही किया जा सकता है कि बाइडेन के सामने पहाड़ जैसे संकट है, पर इसमे भी संदेह नही होना चाहिए कि बाइडेन इन हालातों से निपटने में सक्षम साबित होंगे, वे राजनीति और प्रशासन के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, बाइडेन लगभग पांच दशकों से राजनीति में हैं, अमेरिका से उपराष्ट्रपति भी राह चुके हैं, कई राष्ट्रपतियों को करीब से देखा और जान है, ऐसे में बाइडेन से अमेरिका से साथ बाकी दूसरे देशों को भी उम्मीद बहुत है,

तमाम ऐसे घरेलू और वैश्विक मुद्दे हैं जिनपर अमेरिका को नए सिरे से काम करना होगा, आज अमेरिका की छवि दादागिरी करने वाला देश की बनी हुई है और यह अशांति को जन्म दे रही है, नए राष्ट्रपति को ईरान, दक्षिण कोरिया जैसे देशो के साथ नए सिरे से संतुलित विदेश नीति के साथ चलने की ज़रूरत है, चीन के साथ किस तरह तालमेल बैठाने है यह भी एक जटिल मसला है, ट्रंप के कार्यकाल में जिस तरह इन देशों से टकराव बढ़ा है वह किसी युद्ध से कम नही था, आतंकबाद के मुद्दे पर अमेरिका को दो मुही नीति को त्यागना होगा, हालांकि भारत के साथ अच्छे रिश्ते के संकेत बाइडेन पहले ही से चुके हैं

कमला हैरिस को अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनाना, भारतीय मूल के लोगों के लिए साकारात्मक संदेश है लेकिन अमेरिकी में नस्लीय भेदभाव और हिंसा की घटना शर्म से सर की झुका देती है, ऐसे में अब बाइडेन अमेरिका का सर कैसे ऊंचा करेंगे ये आने वाले वक्त में पता चल जाएगा, MBN Live की तरफ से बाइडेन को अमेरिका के राष्ट्रपति और कमला हैरिस को पहली महिला उपराष्ट्रपति बनने पर बधाई

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